Thursday, September 14, 2023

Har ek sankat ka hal hoga aaj nahi to kal hoga, हर एक संकट का हल होगा, hindi kavita हिंदी कविता


हर एक संकट का हल होगा वह आज नहीं तो कल होगा




माना की है अंधेर बहुत और चारों ओर नाकामी है, 
माना की थककर टूट रहे और सफर अभी दूरगामी है । 

जीवन की आपधापी में जीने का ठिकाना छूट गया , 
माना कि थककर सपनों का नींदों में आना छूट गया । 

माना की हिम्मत टूट गई आंखों में निराशा छाई है, 
माना की चांद पर ग्रहण है और रात अधिक गहराई है । 

पर श्री कृष्ण ने साफ कहा है की कर्म तुम्हारा कल होगा,

कर्म अगर सच्चाई है तो कर्म कहां निष्फल होगा । 


श्री कृष्ण ने साफ कहा है की कर्म तुम्हारा कल होगा , 
कर्म अगर सच्चाई है तो कर्म कहां निष्फल होगा । 


हर एक संकट का हल होगा आज नहीं तो कल होगा ।

 
लोहा जितना तपता है उतनी ही ताकत भरता है , 
सोने को जितनी आग लगे वह उतना प्रखर निखरता है । 


हीरे को जितनी धार लगे वह उतना खूब चमकता है , 
मिट्टी का बर्तन पकता है तब धुन पर खूब खनकता है । 

सूरज जैसा बनना है तो सूरज जितना जलना होगा , 
नदियों सा आदर पाना है तो पर्वत छोड़ निकलना होगा । 


हम आदम के बेटे हैं क्यों सोच राह सरल होगा , 
कुछ ज्यादा वक़्त लगेगा पर संगर्ष जरूर सफल होगा। 

हर एक संकट का हल होगा वह आज नहीं तो कल होगा। 

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