Thursday, September 14, 2023
Har ek sankat ka hal hoga aaj nahi to kal hoga, हर एक संकट का हल होगा, hindi kavita हिंदी कविता
माना की है अंधेर बहुत और चारों ओर नाकामी है,
जीवन की आपधापी में जीने का ठिकाना छूट गया ,
माना की हिम्मत टूट गई आंखों में निराशा छाई है,
श्री कृष्ण ने साफ कहा है की कर्म तुम्हारा कल होगा ,
सूरज जैसा बनना है तो सूरज जितना जलना होगा ,
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Rashmirathi tratiya sarg, रश्मीरथी तृतीय सर्ग ,ho gaya purn agyatwas pandav lote wan se sahas, हो गया पुर्ण अज्ञातवास पांडव लौटे वन से सहास रामधारी सिंह दिनकर जी
रश्मिरथी तृतीय सर्ग हो गया पूर्ण अज्ञात वास , पांडव लोटे वन से सहास, पावक में कनक-सद्रश तपकर , विरत्व लिए कुछ और प्र...
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हर एक संकट का हल होगा वह आज नहीं तो कल होगा माना की है अंधेर बहुत और चारों ओर नाकामी है, माना की थककर टूट रहे और सफर अभी दूरगामी है । जीव...
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रश्मिरथी तृतीय सर्ग हो गया पूर्ण अज्ञात वास , पांडव लोटे वन से सहास, पावक में कनक-सद्रश तपकर , विरत्व लिए कुछ और प्र...
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